Thursday, July 16, 2009

रेत से निकला लड्डू


मैं यानी स्वप्निल राज ग्वालानी जिसे सब प्यार से रानी कहते हैं और मेरा भाई सागर राज ग्वालानी जिसे हम सब प्यार से सोनू कहते हैं। हम दोनों को रेत पर मस्ती करते देखने की कल्पना को साकार करने का काम किया है हमारी प्यारी-प्यारी मम्मी श्रीमती अनिता ग्वालानी ने। मेरे हाथ में जो भी चीच है, वह एक लड्डू की तरह लग रही है। वैसे यह क्या चीज है मैं बताने वाली नहीं हूं। मैं इसके बारे में बाद में बताऊंगी, पहले मैं आप लोगों से जानना चाहती हूं कि ये क्या है?

8 comments:

Nirmla Kapila said...

अरे तुम तुम भी सवाल पूछने लगी? आगे ही ताऊजी राज् भाटिया जी ने नाक मे दम कर रखा है प्रश्न पूछ 2 कर हमसे तखंसने खेलने की बात किया करो बेटाजी बहुत बहुत आशीर्वाद तस्वीर सुन्दर है

रंजन said...

तुम ही तो बता रही हो कि लड्डु है.. फोटो पर कलाकारी अच्छी की है..

प्यार..

महामंत्री - तस्लीम said...

क्‍या बात है। फिर तो टेस्‍ट भी गजब का होगा।

ह ह हा।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

ओम आर्य said...

बढिया है......कलाकारी है

‘नज़र’ said...

बहुत अच्छे बच्चों
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गुलाबी कोंपलें · चाँद, बादल और शाम

राज भाटिय़ा said...

अरे बेटा ना तो तुम रेत पर हो ना ही तुम्हारे हाथ मै लडडू है, ओर हमे भी नही पता कि तुम्हारे हाथ मे अमरुद है, अब बेटा तुम्ही बता दो कि अमरुद है, हम हार मान लेते है, लेकिन चित्र बहुत सुंदर है:

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

ये जरूर मोतीचूर का लड्डू होगा:)

swapnil said...

ये है छिला हुआ संतरा

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