Tuesday, May 3, 2011

मैं प्रधानमंत्री बनी तो देश का लुक बदल दूंगी

महज 13 साल की लड़की सड़क पर किसी आदमी को पोलीथीन फेंकते देखकर कहती है कि अगर मैं कभी देश की प्रधानमंत्री बनी तो देश का पूरा लूक ही बदल दूंगी।
यह लड़की और कोई नहीं बल्कि हमारी बिटिया स्वप्निल राज ग्वालानी हैं। कल की ही बात है, छुट्टी होने के कारण हम स्वप्निल और सागर को घुमाने ले गए थे, जब हम लोग घर वापस आ रहे थे, तभी रास्ते में कार में चल रहे एक आदमी को उसने पोलीथीन फेंकते देखा। इसको देखकर ही उनसे तपाक से कहा कि अगर मैं देश की प्रधानमंत्री बनी तो देश का लुक बदल दूंगी। हमने भी उससे ऐसे ही कुछ सवाल कर दिए, लेकिन उसके जवाब सुनकर जहां हमें इस बात का खुशी हुई कि वह हमारी लड़की है, वहीं हमारा दिमाग चकरा गया कि 13 साल की लड़की की सोच अपने देश के प्रति इतनी गंभीर है।
हमने उससे पूछा कि कैसे लुक बदल देगी?
उसने जवाब दिया, सबसे पहले तो मैं हर तरफ पेड़ लगवाने का काम करूंगी, और, उसने कहा- सड़कें बनवाउंगी, हर स्थान पर डस्टवीन रखवाऊंगी, ताकि कोई कचरा सड़क पर न फेंके।
हमने पूछा इसके बाद भी क्या कचरा पसंद लोग सड़क पर कचरा नहीं करेंगे, तो उसका जवाब था कि ऐसा करने वालों को सजा दी जाएगी।
और क्या करोगी, पूछने पर उसने कहा कि मैं गरीबों के लिए मकान बनवाने का काम करूंगी, हमारे देश को सब गरीबों का देश कहते हैं, गरीबों के लिए मकान हो जाएंगे, वे काम करने लगेंगे तो हमारे देश को भी रिच कंट्री यानी अमीरों का देश माना जाने लगेगा।
एक सबसे बड़ी बात स्वप्निल ने वह कही जिसके बारे में रामदेव बाबा सहित देश के कई दिग्गज कहते हैं कि देश के बाहर से देश का काला धन लाने पर देश अमीर हो जाएगा।
इसमें संदेह नहीं है कि अपने देश का जितना कालाधन बाहर है, अगर उसे सच में वापस लाया जा सके तो अपना देश एक बार फिर से सोने की चिड़िया बन जाएगा, लेकिन ऐसा कभी हो पाएगा ऐसा लगता नहीं है। अपना देश जिस तरह से भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है उससे लगता नहीं है कि कभी अपने देश के कालेधन को वापस लाने का प्रयास कोई सरकार करेगी। जब सत्ता में बैठने वाले ही पूरी तरह से भ्रष्ट हैं तो फिर किसकी हिम्मत है कि वह देश के बाहर से काले धन को वापस ला सके। राम देव बाबा महज बातें कर सकते हैं, लेकिन उनके चीखने-चिलाने से कुछ होने वाला नहीं है।
बहरहाल हमें इस बात की बहुत ’यादा खुशी है कि हमारी छोटी सी बेटी अपने देश के बारे में इतना सोचती है, हमने कभी सपने में भी कल्पना नहीं की थी कि हमारी बेटी के विचार इतने अच्छे हो सकते हैं। लेकिन कहते हंै न कि खून का असर तो होता है, जब हम अपने देश, रा’य और समाज के लिए लगातार सोचते हैं तो क्यों कर न हमारी बेटी भी ऐसा सोचेगी।
काश अपने देश की हर बेटी और हर बेटा ऐसा सोचने वाला हो जाए तो फिर अपने देश को सोने की चिड़िया बनने से काई नहीं रोक सकता है। हमारी तो भगवान से यही दुआ है कि देश के हर बेटे और बेटी की सोच को हमारी स्वप्निल जैसी कर दे ताकि आने वाले समय में जब ये बड़े हों तो इस देश का वास्तव में ऐसा लुक हो जाए कि लोग वाह-वाह करने लगे तभी हम वास्तव में सर उठाकर कह पाएगा, मेरा देश महान।

Saturday, January 1, 2011

आज हमारी मम्मी का जन्म दिन है


आज नए साल का पहला दिन है, इसी के साथ हमारी मम्मी अनिता ग्वालानी का जन्म दिन भी है। आज का दिन हमारे यानी मेरे स्वप्निल राज ग्वालानी और मेरे छोटे भाई सागर राज ग्वालानी के लिए दोहरी खुशी का है।

नए साल की हमारे तरफ से सभी को बधाई

Saturday, July 3, 2010

पापा ने पहली बार काटा केट






मेरे पापा राजकुमार ग्वालानी का एक जुलाई को जन्मदिन था। मेरे पापा कभी जन्मदिन नहीं मनाते हैं। लेकिन इस बार हमने यानी मैं, मेरी मम्मी अनिता ग्वालानी और मेरे भाई सागर ग्वालानी ने तय किया कि पापा से केट कटवाएंगे। उनको बताए बिना केट बनवा लिया और घर की सजावट करके उनसे रात में केट कटवाया। पापा को यह बहुत अच्छा लगा।

Thursday, July 1, 2010

आज मेरे पापा राजकुमार ग्वालानी का जन्म दिन है


आज मेरे पापा राजकुमार ग्वालानी का जन्म दिन है। मैंने जहां सुबह उठते साथ उनको बधाई दी, वहीं मैंने तो उनको दो दिन पहले ही गिफ्ट दे दिया था। क्या करती गिफ्ट लाने के बाद रहा नहीं गया तो मैंने ऐसा किया। आप भी चाहें तो मेरे पापा को जन्म दिन की बधाई दे सकते हैं।

Tuesday, June 15, 2010

सोनू भी हो गया पास


अपना सोनू बाबा भी पास हो गया है। उसको अपनी शरारत के कारण पूरक परीक्षा देनी पड़ी थी। परीक्षा के समय मस्ती करते हुए उसने झूले से कूद कर अपना हाथ तोड़ लिया था। ऐसे में उसे पूरक परीक्षा देनी पड़ी। पूरक परीक्षा में वहीं एक छोटा लड़का था, बाकी सब बड़े लड़के थे। सोनू को पूरक परीक्षा में बहुत अच्छे नंबर मिले। वह खुश है कि अब वह क्लास वन में पढ़ेगा। हम लोगों का स्कूल कल के खुलेगा। मैं अब सातवीं क्लास में पहुंची हूं।

Sunday, June 13, 2010

चवन्नी जानेमन-अठन्नी दिलरूबा

चवन्नी जानेमन-अठन्नी दिलरूबा
चवन्नी जानेमन-अठन्नी दिलरूबा
बेचारा दो का नोट बीमार पड़ गया
बीमार पड़ गया डॉक्टर आ गया
डाक्टर आ गया, सुई लगा गया
सुई थी गलत ,बेचारा मर गया
बेचारा मर गया, भूत बन गया
भूत बन गया, सबको खा गया
सबको खा गया, पंडित आ गया
पंडित आ गया, मंत्र पढ़ गया
मंत्र था क्या
ओम जय जगदीश हरे
स्वामी जय जगदीश हरे
पंडित जी पेड पर चढ़े
पेड़ था दुबला-पतला
पंडित जी नीचे गिरे
ओम जय जगदीश हरे

Tuesday, February 16, 2010

ये रही मेरी मित्र मंडली








चलिए मैं आपको अपनी मित्र मंडली से मिलवाती हूं। मेरे जन्म दिन पर आई मित्र मंडली की कुछ तस्वीरें पेश हैं। मेरे जन्म दिन में मेरे 50 से भी ज्यादा मित्र आए थे।

हिन्दी में लिखें