Saturday, December 19, 2009

कोहरे से घिरी राजधानी











सुबह को 6.30 बजे पापा उठे तो उन्होंने बताया कि भारी कोहरा छाया है। ऐसे में मैं और सोनू भी उठ गए और छत पर चले गए। तब तक पापा कैमरा लेकर आ गए और फोटो खींचने लगे। पापा ये फोटो अपने ब्लाग राजतंत्र में डालने वाले थे, पर मैंने कहा कि पापा इसे मेरे ब्लाग में डाल दो वे मान गए। आप भी करे कोहरे का नजारा और बताएं की कैसे हैं फोटो ।

Wednesday, December 16, 2009

टीवी पर हुआ सोनू मेहरबान












मेरा भाई सोनू जब किसी पर मेहरबान होता है तो दे दनादन फोटो खींच लेता है, इस बार उसकी मेहरबानी टीवी पर हुई है.. देखें ...

Sunday, December 13, 2009

रानी तू तो बिलकुल पास दिख रही है



सोनू बाबा ने पापा राजकुमार ग्वालानी से कहकर एक दूरबीन मंगवाई है। इस दूरबीन के आते ही वह दिन भर इससे खेलता रहा और कभी मुझे तो कभी मम्मी को दूर जाकर देखता रहा और बोलता रहा कि रानी तू तो बिलकुल पास दिख रही है। सोनू छत पर भी चला गया और दूरबीन से दूर की चीजों को देखते रहा। सुबह से शाम तक यह सिलसिला चला और अंत में रात तक दूरबीन सोनू से दूर हो गई। कारण इसको उसने एक दिन में ही तोड़ दिया।

Saturday, December 12, 2009

दिन हो या रात-पापा करते हैं बात

हमारे पापा को न तो दिन को चैन रहता है और न ही रात को। जब देखों बस काम ही काम। खाना खाने घर आते हैं तो फोन आ जाता है, रात को घर में रहते हैं तो फोन आ जाता। न जाने कितने फोन आते रहते हैं और पापा है कि बस बात करते रहते हैं। पापा पूछने पर कहते हैं कि क्या करें बेटा प्रेस का काम ही ऐसा है, न जाने कब किस खबर के लिए भागना पड़े। अब इतने लोगों से खबरों को लेकर जहां रिश्ता है, वहीं दोस्त भी बहुत हैं, ऐसे में बातें तो होंगी। एक तरफ पापा फोन में बात करते हैं तो दूसरी तरफ घर में भी या तो प्रेस का काम करते हैं, या फिर अपनी पत्रिका और ब्लाग खेलगढ़ का काम या फिर राजतंत्र में कुछ लिखने का काम। जब समय मिल जाता है तो हमारे ब्लाग के लिए कुछ लिखवा लेते हैं। कल रात को जैसे ही पापा घर के सामने अपने मोबाइल पर किसी से बात कर रहे थे तो अपने सोनू बाबा ने जाकर खींच दी पापा की फोटो। सोनू वैसे भी फोटो खींचने की दीवाना है।

Friday, December 11, 2009

पहचान कौन?








मेरे भाई सोनू यानी सागर राज ग्वालानी को फोटो खींचने का बहुत शौक है, वह न जाने कैसे-कैसे फोटो खींचते रहता है। अब देखिए और पहचानिए कि ये कौन है? ये कोई और नहीं अपने सोनू बाबा है। ये फोटो खुद उसने सोफे पर उल्टे होकर खींची है। आंघे घंटे से भी कम समय में उसने 100 से ज्यादा फोटो खींच दी। अब पापा से कहता है कि इन सभी फोटो को रानी के ब्लाग में नहीं अपने ब्लाग राजतंत्र में डाले।

Monday, December 7, 2009

ललित शर्मा अंकल से मिले हम



ब्लाग बिरादरी में आने के बाद पहली बार हमें किसी ब्लागर अंकल से मिलने का मौका मिला। पापा (राजकुमार ग्वालानी) से मिलने जब कल हमारे घर ललित शर्मा अंकल आएं तो उनसे मैं और मेरे भाई सोनू ने मुलाकात की। पापा और अंकल कल भिलाई की ब्लागर बैठक में गए थे। इसकी खबर मैंने कल अपने ब्लाग में दी थी। वहां क्या हुआ यह पापा ने अपने ब्लाग राजतंत्र में लिखा है। पापा ने हमें बताया है कि भिलाई में भी इस बात पर चर्चा हुई है हम छोटे ब्लागर बच्चों का भी एक ब्लागर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। ऐसी ही बात अनिल पुसदकर अंकल ने भी कही है कि बेटा जरूर आप लोगों का भी सम्मेलन होगा। और भी कई अंकल और आंटी यह बात कह रहे हैं, हमें भी ऐसे किसी सम्मेलन का इंतजार रहेगा। मैं सोचती हूं कि जब बड़ों का सम्मेलन हो तो साथ में हमारा भी सम्मेलन करवा दिया जाए ताकि छोटे-बड़े ब्लागर एक मंच पर हो। आप लोग क्या सोचते हैं जरूर बताएं।

Sunday, December 6, 2009

भिलाई में ब्लागरों की चिंतन बैठक

एक तरफ जहां मुंबई में ब्लागरों का सम्मेलन चल रहा है, वहीं भिलाई में भी ब्लागरों की एक चिंतन बैठक आज होने वाली है। इस बैठक में हमारे पापा राजकुमार ग्वालानी हमारे ललित शर्मा अंकल के साथ भिलाई गए हैं। पापा से मैंने कहा कि पापा आज मेरी छूटी है, मुझे भी ले चले, पर पापा ने मना कर दिया कि बेटा यह बड़े ब्लागरों की चिंतन बैठक है, आप जाकर क्या करेंगी। पापा ने कहा कि अब जब कभी कोई ब्लागर सम्मेलन होगा जिसमें कोई चिंतन बैठक नहीं होगी तो आपको ले चलेंगे। क्या कोई बैठक बिना चिंतन के भी होती है। देखें कब होगा ऐसा सम्मेलन जिसमें पापा मुझे भी ले जाएंगे। नहीं तो मैं सोच रहीं हूं कि क्यों न मेरे जैसे छोटे ब्लागरों का ही एक सम्मेलन करवा लिया जाए, क्या ख्याल है मित्रों।

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