Monday, October 19, 2009

मैं पापा बन जाऊं


रानी पापा का चश्मा दे दे

मैं पापा बन जाऊं

कम्प्यूटर पर बैठकर

मैं भी राजतंत्र और खेलगढ़

में पोस्ट चढाऊं

पापा की तरह प्रेस जाकर

मैं भी कई समाचार बनाऊं

समाज के साथ अपने देश

की सेवा मैं भी कर पाऊं

कोई भी करे गलत काम तो

पापा की तरह मैं भी उसको समझाऊं

6 comments:

Mishra Pankaj said...

जल्दी बन जाओगे दोस्त :)

Udan Tashtari said...

ऐसा....बहुत सही जा रहे हो!! :)

M VERMA said...

समाज के साथ अपने देश
की सेवा मैं भी कर पाऊं
अच्छा लगा पढकर

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर बेटा, जल्दी जल्दी पढ लिख जाओ फ़िर तो पापा ही बनना है ना.

सैयद | Syed said...

वाह जी,, क्या बात है...

संगीता पुरी said...

सुंदर रचना है .. वाह !!

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